नई दिल्ली: चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा विपक्षी INDIA गठबंधन अब अपनी आगे की रणनीति को लेकर चर्चा में है। इसी बीच 22 अक्टूबर 2026 को होने वाली गठबंधन की ऑनलाइन बैठक स्थगित होने की खबर सामने आई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में प्रस्तावित इस बैठक में ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर आंदोलन की अगली रूपरेखा और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चर्चा होनी थी। हालांकि, बैठक टलने की वजह और नई तारीख को लेकर स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने आए बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
क्यों अहम मानी जा रही थी INDIA गठबंधन की बैठक?
‘वोट चोरी’ का मुद्दा पिछले कुछ समय से विपक्षी दलों के राजनीतिक अभियान का प्रमुख हिस्सा बना हुआ है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई नेताओं ने मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
इसी मुद्दे पर साझा रणनीति तैयार करने के लिए गठबंधन के नेताओं की ऑनलाइन बैठक प्रस्तावित थी। इसका उद्देश्य अलग-अलग विपक्षी दलों के बीच तालमेल बनाना और आगे के विरोध-प्रदर्शनों की दिशा पर विचार करना था। ऐसे में बैठक का स्थगित होना राजनीतिक घटनाक्रम के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में किन मुद्दों पर होनी थी चर्चा?
प्रस्तावित बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को अध्यक्षता करनी थी। बैठक के एजेंडे में ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर विरोध-प्रदर्शन की आगे की रणनीति और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दबाव बढ़ाने जैसे मुद्दे शामिल थे।
इसके अलावा, दिल्ली में 1 नवंबर को प्रस्तावित INDIA गठबंधन की रैली की तैयारियों की समीक्षा भी की जानी थी। विपक्षी दल इस रैली के माध्यम से चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अपने सवालों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, बैठक स्थगित होने के बाद इन विषयों पर कोई नया साझा फैसला हुआ है या नहीं, इसकी पुष्टि के लिए गठबंधन की आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना होगा।
‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर पहले भी प्रदर्शन कर चुका है विपक्ष
INDIA गठबंधन के नेता इससे पहले भी इस मुद्दे पर एकजुट होकर विरोध दर्ज करा चुके हैं। 12 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं ने दिल्ली में ‘मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ के तहत सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया था। इस दौरान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाए गए। विपक्षी नेताओं ने इन मुद्दों पर कानूनी हस्तक्षेप की मांग भी की थी।
इसके बाद 13 अक्टूबर को राहुल गांधी ने अपने आवास पर INDIA गठबंधन के नेताओं के साथ बैठक की। इस मुलाकात के बाद विपक्षी नेताओं ने ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर अपना अभियान जारी रखने की बात कही थी। मौजूदा घटनाक्रम इसी राजनीतिक अभियान की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
1 नवंबर की रैली पर भी टिकी नजरें
दिल्ली में 1 नवंबर को प्रस्तावित INDIA गठबंधन की रैली विपक्ष के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस कार्यक्रम के जरिए गठबंधन चुनावी पारदर्शिता, मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और चुनाव आयोग की भूमिका से जुड़े मुद्दों को उठाना चाहता है।
बैठक में रैली की तैयारियों की समीक्षा भी होनी थी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि गठबंधन के नेता नई तारीख पर बैठक कर पाते हैं या नहीं और रैली को लेकर आगे क्या निर्णय लेते हैं। विपक्ष की साझा रणनीति का असर उसके आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों पर भी पड़ सकता है।
बैठक टलने के बाद अब आगे क्या?
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि INDIA गठबंधन की अगली बैठक कब होगी और उसमें किन मुद्दों पर सहमति बनती है। बैठक स्थगित होने की खबर अपने आप में किसी राजनीतिक मतभेद या रणनीति में बदलाव का प्रमाण नहीं है। इसके पीछे की वजह स्पष्ट होने के बाद ही स्थिति को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा।
‘वोट चोरी’ के आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोप हैं। चुनावी प्रक्रिया से जुड़े इन दावों और उनके जवाबों को तथ्यों तथा आधिकारिक बयानों के आधार पर देखना जरूरी है। आने वाले दिनों में गठबंधन की बैठक, प्रस्तावित रैली और चुनाव आयोग से जुड़े घटनाक्रम पर राजनीतिक नजरें बनी रहेंगी।
