भारत में कारोबारी गतिविधियों ने पकड़ी रफ्तार, लेकिन नई नौकरियों की बढ़ोतरी धीमी

भारत में कारोबारी गतिविधियों में तेजी और नई नौकरियों की धीमी रफ्तार दर्शाती बिजनेस न्यूज़ तस्वीर

भारत की निजी क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियों में अक्टूबर 2026 के दौरान तेजी देखने को मिली है। नए ऑर्डर बढ़ने और सेवा क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन के कारण कारोबार की रफ्तार पिछले चार महीनों के उच्च स्तर पर पहुंच गई। हालांकि, इस सकारात्मक संकेत के बीच रोजगार के मोर्चे पर तस्वीर उतनी मजबूत नहीं दिखी। कंपनियों ने कामकाज बढ़ने के बावजूद नई भर्तियों में ज्यादा तेजी नहीं दिखाई। यह जानकारी एचएसबीसी के फ्लैश इंडिया परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) के शुरुआती सर्वेक्षण में सामने आई है।

चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंचा कारोबारी सूचकांक

सर्वेक्षण के अनुसार, भारत का एचएसबीसी फ्लैश कंपोजिट पीएमआई आउटपुट इंडेक्स सितंबर के 55.9 से बढ़कर अक्टूबर में 56.7 पर पहुंच गया। यह जून के बाद कारोबारी गतिविधियों में सबसे तेज विस्तार का संकेत है। पीएमआई में 50 से ऊपर का आंकड़ा गतिविधियों में विस्तार और 50 से नीचे का आंकड़ा संकुचन दर्शाता है। इसका मतलब है कि विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में कारोबार का स्तर बढ़ा, हालांकि यह आंकड़ा अपने आप में देश की जीडीपी वृद्धि या रोजगार में समान अनुपात की बढ़ोतरी को नहीं दर्शाता।

सेवा क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन, नए ऑर्डर से मिला सहारा

अक्टूबर में सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में सुधार ने कुल कारोबारी प्रदर्शन को मजबूती दी। सेवा क्षेत्र का बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स सितंबर के 55.2 से बढ़कर 56.2 पर पहुंच गया। कंपनियों को नए ऑर्डर मिलने और बाजार की मांग में सुधार से कामकाज बढ़ाने में मदद मिली। विदेशों से मिलने वाले नए ऑर्डर में भी छह महीनों की सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई। अमेरिका, ब्रिटेन, पश्चिम एशिया और बांग्लादेश जैसे बाजारों से मांग बढ़ने की जानकारी सर्वेक्षण में सामने आई।

कारोबार बढ़ा, फिर भी नई भर्तियों की रफ्तार क्यों घटी?

इस रिपोर्ट का सबसे अहम पहलू रोजगार से जुड़ा है। कारोबारी गतिविधियां बढ़ने के बावजूद अक्टूबर में रोजगार में केवल मामूली बढ़ोतरी हुई, जो 2026 में अब तक की सबसे धीमी रफ्तार रही। सेवा क्षेत्र की कंपनियों में कर्मचारियों की संख्या में कोई खास बदलाव नहीं हुआ। इसके साथ ही, सेवा क्षेत्र में लगातार नौ महीनों से जारी रोजगार वृद्धि का सिलसिला भी थम गया। विनिर्माण क्षेत्र में कर्मचारियों की संख्या थोड़ी बढ़ी, लेकिन वहां भी भर्ती की गति सीमित रही।

सर्वेक्षण के मुताबिक, कई कंपनियों को लगा कि उनके मौजूदा कर्मचारी बढ़े हुए काम को संभालने के लिए पर्याप्त हैं। ऐसे में उन्होंने नए लोगों की भर्ती करने के बजाय मौजूदा कर्मचारियों से ही काम पूरा कराने पर जोर दिया। काम लंबित रहने की मात्रा में गिरावट भी इसी स्थिति का एक संकेत है। हालांकि, इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि पूरे देश में रोजगार घट गया है। आंकड़े निजी क्षेत्र की गतिविधियों और भर्ती की गति के बारे में शुरुआती संकेत देते हैं।

महंगाई के दबाव में भी आई नरमी

कारोबारी सर्वेक्षण में कीमतों से जुड़ा एक सकारात्मक संकेत भी सामने आया। कंपनियों की उत्पादन लागत में बढ़ोतरी की रफ्तार लगातार सातवें महीने धीमी हुई और यह लगभग एक साल के निचले स्तर पर पहुंच गई। तैयार वस्तुओं और सेवाओं की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी भी अपेक्षाकृत धीमी रही। हालांकि, कुछ कंपनियों ने स्टील और परिवहन की लागत बढ़ने का जिक्र किया। इसलिए लागत का दबाव कम होने का अर्थ यह नहीं है कि हर वस्तु या सेवा की कीमत घट गई है।

आम लोगों और नौकरी तलाश रहे युवाओं के लिए क्या मायने हैं?

कारोबारी गतिविधियों में तेजी अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत हो सकती है, क्योंकि इससे कंपनियों को अधिक ऑर्डर मिलते हैं और उत्पादन तथा सेवाओं का विस्तार होता है। लेकिन नौकरी तलाश रहे युवाओं के लिए केवल कारोबार बढ़ने की खबर पर्याप्त नहीं है। रोजगार के वास्तविक अवसर इस बात पर निर्भर करते हैं कि कंपनियां अपने कारोबार के विस्तार के साथ कितने नए कर्मचारियों की जरूरत महसूस करती हैं।

इसलिए आने वाले महीनों में भर्ती, वेतन, नए ऑर्डर और कंपनियों के निवेश से जुड़े आंकड़ों पर नजर रखना जरूरी होगा। यदि मांग में सुधार लंबे समय तक बना रहता है और कंपनियों को अतिरिक्त कर्मचारियों की जरूरत पड़ती है, तो भर्ती में तेजी आ सकती है। फिलहाल अक्टूबर का सर्वेक्षण कारोबार में मजबूती और रोजगार वृद्धि की धीमी गति, दोनों पहलुओं को सामने रखता है।

आगे क्या देखना होगा?

अक्टूबर के ये आंकड़े शुरुआती फ्लैश सर्वेक्षण पर आधारित हैं। विनिर्माण, सेवा और संयुक्त पीएमआई के अंतिम आंकड़े नवंबर की शुरुआत में जारी होने की उम्मीद है। उनसे यह समझने में मदद मिलेगी कि कारोबार की तेजी कितनी मजबूत रही और रोजगार से जुड़े शुरुआती संकेतों में कोई बदलाव आया या नहीं।

कुल मिलाकर, अक्टूबर में भारतीय निजी क्षेत्र ने कारोबारी गतिविधियों में बेहतर प्रदर्शन किया है, लेकिन इसका लाभ नई नौकरियों के रूप में अभी व्यापक रूप से दिखाई नहीं दिया। यही इस रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण संदेश है।

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