योगी आदित्यनाथ आज भारतीय राजनीति का एक ऐसा चेहरा हैं, जिनकी चर्चा देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में होती है। उत्तराखंड के एक छोटे से गाँव से निकलकर देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री (UP CM Yogi Adityanath) बनने तक का उनका सफर बेहद दिलचस्प रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक समय ऐसा भी था जब वह राजनीति से दूर, विज्ञान और गणित की किताबों में रमे रहते थे? आइए जानते हैं उनकी जिंदगी के उस मोड़ के बारे में, जिसने एक साधारण छात्र को संन्यासी और फिर एक फायरब्रांड नेता बना दिया।
कॉलेज के दिनों में ही दिखने लगी थी नेतृत्व की झलक
योगी आदित्यनाथ (तब अजय सिंह बिष्ट) का शुरुआती जीवन एक सामान्य पहाड़ी छात्र की तरह ही बीता। उन्होंने ऋषिकेश के सरकारी कॉलेज से गणित में स्नातक (B.Sc) की पढ़ाई की। कॉलेज के दिनों से ही उनके भीतर नेतृत्व के गुण दिखाई देने लगे थे।
वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के सक्रिय कार्यकर्ता बने और छात्र राजनीति में कदम रखा। इस दौरान:
- तर्कसंगत बात: कॉलेज की वाद-विवाद प्रतियोगिताओं (Debates) में वह बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे।
- स्पष्ट वक्ता: किसी भी सामाजिक या राष्ट्रवादी मुद्दे पर अपनी बात बेहद सीधे और बेबाक अंदाज में रखते थे।
- लोकप्रियता: बहुत कम उम्र में ही उनकी तीखी और स्पष्ट बोलने की शैली ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचना शुरू कर दिया था।
महंत अवैद्यनाथ से वो ऐतिहासिक मुलाकात
अजय सिंह बिष्ट की जिंदगी में सबसे बड़ा और ऐतिहासिक मोड़ तब आया, जब उनकी मुलाकात गोरखनाथ मंदिर के तत्कालीन महंत अवैद्यनाथ से हुई।
महंत अवैद्यनाथ सिर्फ एक धार्मिक गुरु नहीं थे, बल्कि वह सामाजिक और राजनीतिक रूप से भी बेहद सक्रिय और प्रभावशाली व्यक्तित्व थे। इस पहली छोटी सी मुलाकात ने युवा अजय के मन पर गहरा असर छोड़ा।
- महंत जी के विचारों और ओजस्वी व्यक्तित्व से प्रभावित होकर उनका झुकाव गोरखनाथ मठ की तरफ बढ़ने लगा।
- धीरे-धीरे उनका मन सांसारिक मोह-माया से हटने लगा और उन्होंने अध्यात्म की राह चुन ली।
- अंततः, उन्होंने संन्यास ले लिया और अजय सिंह बिष्ट से 'योगी आदित्यनाथ' बन गए।
संन्यास से संसद और फिर उत्तर प्रदेश की कमान
गोरखनाथ पीठ से जुड़ने के बाद योगी आदित्यनाथ का सार्वजनिक और सामाजिक जीवन काफी तेजी से बदला। वह केवल मंदिर की गतिविधियों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने पूर्वी उत्तर प्रदेश की जनता की समस्याओं को उठाना शुरू किया।
- संसद में सबसे युवा चेहरा: साल 1998 में मात्र 26 साल की उम्र में उन्होंने गोरखपुर से पहली बार लोकसभा चुनाव जीता और देश के सबसे युवा सांसदों में शामिल हुए।
- गोरखपुर का किला: इसके बाद उन्होंने लगातार पांच बार गोरखपुर लोकसभा सीट से जीत दर्ज की और क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत की।
- यूपी की सत्ता पर काबिज: साल 2017 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उत्तर प्रदेश में ऐतिहासिक जीत दर्ज की और आलाकमान ने राज्य की कमान योगी आदित्यनाथ को सौंपी। इसके बाद साल 2022 में भी दोबारा जीतकर उन्होंने इतिहास रच दिया।
निष्कर्ष: क्यों खास है यह सफर?
अगर योगी आदित्यनाथ के पूरे जीवनक्रम को देखा जाए, तो कॉलेज के दिनों में छात्र राजनीति का अनुभव और फिर महंत अवैद्यनाथ से हुई वह एक मुलाकात ही उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट थी। यदि वह मुलाकात न हुई होती, तो शायद देश को इतना बड़ा संन्यासी राजनेता न मिलता। एक साधारण छात्र से लेकर गोरखनाथ परंपरा के मुख्य महंत और फिर देश के सबसे बड़े सूबे के मुख्यमंत्री बनने का यह सफर वाकई प्रेरणादायक है।
